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keya aap ko lgta hai ki sbka malik ek hai

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दुनिया में मानव जीवन शुरू करने के लिए सृष्टि रचियता ने आदम और हवा को धरती पर भेजा है।  सेब जैसे स्वादिष्ट फल का मजा उन्होंने लिया और उसके बाद जितने भी आदमी हवा पैदा हुए उन्होंने उतपति के सिद्धांत का पीछा नहीं छोड़ा और अब हाल यह है कि पूरी दुनिया के कुछ देश तो इन दोनों के आकषर्ण के परिणामो को बुरी तरह झेल रहे है। ज्यो ज्यो जनसख्याँ बढ़ती रही इंसान ने अपने शौक व इछाओ के अनुरूप अपने -अपने समहुओ का स्थापन व विस्तार किया। कोई शक्तिशाली व्यक्ति समहू  मालिक बनता गया। कई  जमानो तक यही माना जाता रहा है कि सबका मालिक एक है        आशय नीली छतरी वाले मालिक से ही रहा होगा। लेकिन यह सोच अंदर खाते बदलती भी रही। सामाजिक व आर्थिक  बदलावों  व विकास के कारण , विश्वास के वृक्ष की शाखाएँ फैलती रही और उनमे उगी असंतुस्टी ने नए धर्म ,विश्वास व आस्थाएं पैदा की। हर आँगन से यही प्राचीन प्रवचन दोहराया गया कि सबका मालिक एक है         झिड़ी मेले में लोक नायक बाबा जित्तो की क़ुरबानी याद करने उमड़ते है भगत।  बड़े धर्मो की बैठकों में जब...