jliyavala bag
भारत के स्वत्रंता सग्राम में जलियावाला बाग नरसंहार आज भी लोगो के रोंगटे खड़े कर देता है। इस कहानी में हमने अपने ह्रदय की वेदना को व्यक्त किया है। ओ बलिदान के अमर चिन्ह !करवट बदलते संसार के रक्तरंजित इतिहास की सिसकती पृस्ठभूमि पर वह दिन गौरवमय आँसू से डूबी कलम से लिखा जाता रहेगा ,जब स्वाधीनता के मतवाले साहसी वीरो ने नृशंस डायर को ही नहीं ,समस्त अंग्रेजी सत्तो को ललकारते हुए तुम्हारे विशाल प्रांगण में एक विशाल -सभा का आयोजन किया। पराधीनता की विषैली वायु में सांस लेते -लेते जब तुम्हारी घुटन सब्र की सीमा को लाँघ गई -तुमने अपना विशाल वर्कस्थ्ल खोल दिया -व्याकुल भुजाएँ फैला दी ,वीरो का स्वागत करने के लिए। उस समय तुममे कितना उत्साह था। तुम्हारा एक -एक अंग गौरव -वीरता से भड़क उठा ,तुम्हारे अंतर् की असीम गहराइयों में स्वाधीनता के शोले धधक रहे थे ,तुम्हारा चेतन -मानस पुकार उठा ,ह्रदय ने आहवान किया। ओ अमर धरा ! तुमने अपने समस्त अरमानो को स्वाधीनता की धधकती ज्वाला में झोंक द...