khrgosh ki smjhdari
इस कहानी में हम आप को खरगोश की समझदारी का किस्सा सुनाते है। एक जंगल था। उस जगंल में एक शेर था ,वह प्रतिदिन रोज उस जंगल के जानवरो को मारकर खा जाता था। जिससे जगंली जानवरो में भय बढ़ गया था। हर रोज वह किसी को परेशान करता और अपनी ताकत का गलत उपयोग करता था। उसी जगंल में एक बूढ़ा भेड़िया रहता था। बूढ़े भेड़िये ने एक सभा लगाई ,उस सभा में सभी जंगली जानवरो को बुलाया गया। जगंल में तंग भी जानवरो से उस जगंली शेर से बचने के लिए अपने -अपने सुझाव देने लगे। तभी उनमे बैठा एक समझदार खरगोश बोला>>श्रीमान जी में इस समस्या से निपटने के लिए आप सभी का साथ चाहता हूँ। सभी जगंली जानवरो ने खरगोश का साथ देने का वादा किया। खरगोश उस सभा से निकलकर उस जगंली शेर की और चल दिया। जैसे ही वह शेर की गुफा के पास पहुंचा ,तभी शेर की नजर खरगोश पर पड़ी। खरगोश ने शेर भाई से राम करी ,शेर बोल >>आज तक मेरे पास आने की किसी की हिमंत नहीं हुई ,लेकिन आज तुम मेरे पास क्यों आये हो ? खरगोश ने कहा ...