vidhya aur budhi
इस कहानी में हमे यह शिक्षा मिलेगी कि केवल किताबी ज्ञान ही नहीं होना चाहिए बल्कि उसके साथ -साथ बुद्धिमान भी होना चाहिए। एक गांव में चार हम उम्र के लड़के रहते थे ,केशव ,माधव ,हरि और गोपाल। चारो साथ -साथ खेलते ,खाते और साथ -साथ पढ़ते। चारो में आपस में बहुत प्रेम था। चारो लड़के पढ़ने में बहुत होशियार थे। धीरे -धीरे चारो लड़के बड़े होने लगे। पढ़ाई के प्रति उनका लगाव देखकर चारो के माता -पिता ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए काशी भेजने का निर्णय लिया। चारो लड़के काशी जाकर अपनी -अपनी इच्छा के अनुसार विषय चुनकर ,उन विषयो की खूब मन लगाकर पढ़ाई करने लगे। केशव ने व्याकरण विषय चुना तो माधव ने ज्योत्षी। हरि को लोगो का इलाज करने का बहुत शोक था ,इसीलिए उसने वैधक और हमेशा चारो दोस्तों के बीच किसी बात को लेकर हुए विवाद को सुलझाने वाले गोपाल ने न्याय विषय चुना। कई वर्ष बाद खूब पढ़ लिखकर जब चारो अपने -अपने विषय के पूर्ण ज्ञाता बन गए तब वह वापस अपने गांव की ओर चल दिए। ...