Panch prrmesver
हमे अपने कर्तव्य का पालन पूरी निर्भीकता से करना चाहिए। इस कहानी में यही संदेश दिया गया है। अलगू चौधरी और जुम्मन शेख में गाढ़ी मित्रता थी। अलगू चौधरी ने जुम्मन शेख के पिता से उसके साथ ही शिख्सा पायी थी। दोनों को एक -दूसरे पर भरोसा था और आड़े समय में दोनों मित्र एक -दूसरे का साथ खुलकर देते थे। अलगू चौधरी कही बाजार जाता तो अपना घर जुम्मन के भरोसे छोड़ जाता। इसी तरह जुम्मन शेख अपने घर -दवारा की जिम्मेदारी अलगू चौधरी को सौंप जाता था। जुम्मन की एक बूढ़ी मौसी "खाला "थी। जुम्मन के सिवाय इस दुनिया में उसका कोई नहीं था। वह जुम्मन के साथ ही रहती थी। जब तक उसने अपने खेत व घर की सपत्ति जुम्मन के नाम नहीं लिख दी ,तब तक उसकी पूरी खातिदारी होती रही ,लेकिन सपंत्ति लिखते ही उसकी खातेदारी में कमी आ गयी। यहा तक की रोटी -दाल के भी लाले पड़ने लगे। जुम्मन की पतनी गर्म मिजाज की थी। वह रोटियों के साथ कड़वी बातें भी कहने लगी "-बुढ़िया कब तक जियेगी। दो तीन बीघा ऊसर जमीन क्या दे दी ,मानो हमे ...