har ki jeet
किसी के साथ विश्वासघात करना बहुत बुरी बात है। यही इस कहानी में हम बताने की चेस्टा कर रहे है। माँ को अपने बेटे , सहूकार को अपने देनदार और किसानो को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद प्राप्त होता है , वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर होता था। भगवदभजन से जो समय बचता , वह घोड़े को अर्पण हो जाता। वह घोडा बहुत ही सुंदर और बलवान था। इसके जोड़ का घोडा पुरे इलाके में न था। बाबा भारती इसे सुल्तान कहकर पुकारते थे। अपने हाथ से खरहरा करते , खुद दाना खिलते और देख -देखकर प्रसन्न होते थे। उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया था -रुपया ,माल ,जमीन। अब गांव के बहार छोटे से मंदिर में रहते और भगवान का भजन करते थे। जब तक संध्या समय सुल्तान पर चढ़कर आठ दस मील का चककर न लगा लेते , तब तक उन्हें चैन न आता। खड़क सिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर ही काँपते थे। होते -होते सुल्तान की कीर्ति उसके कानो तक भी पहुंची। उसका ह्रदय उसे देखने के लिए अधीर हों उठा। एक दिन वह दोपहर के समय बाबा भारती के पास पहु...