bhart ke sanskar
अपने बच्चो को दे अच्छे संस्कार। भारत महान था ,सोने की चिड़िया कहलाता था। इसलिए नहीं कि उसकी सीमाएँ विस्तृत थी ,अपितु इसलिए कि यहाँ का हर व्यक्ति सुसंस्कृत था। जो भी कर्म हम करते है ,वह हमारे संस्कारो से प्रेरित होकर किया जाता है। हम वैसा ही कर्म करेगें ,जैसे हमारे संस्कार होंगे। ये संस्कार हमारे आज के क्रिया -कलापो के दादा -दादी ,नाना -नानी ,माता -पिता तथा पूर्व जन्मो से संचित होते है। इनको अच्छा बनाने का काम माता -पिता से ही प्रारंभ होता है। बच्चो को कैसे बनाना है -वह माता -पिता ,गुरुजनो के हाथ में है। हमारे जीवन से दोषो को निकालने के लिए ,गुणों को लाने के लिए और जो भी कमी है उसको पूर्ण करने के लिए संस्कारो की अपेक्षा होती है। बच्चो के शरीर को ,उनके चरित्र को ,उनकी विद्या को ,उनकी बुद्धि को और जीवन -प्रणाली को संवारने के लिए जो क्रिया -कलाप किए जाते है -उनको संस्कार कहते है। बालको को शिक्षित करने के लिए जहाँ एक और विषय की जान...