aaram hram hai
विशेष>> > इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है कि हमे जीवन में सदैव महेनती होना चाहिए। कभी आलस नहीं करना चाहिए क्योकि "आराम हराम है। " बहुत समय पहले एक गांव में एक बहुत धनवान किसान था। किसान को उसके पुरखो से बहुत -से धन सम्पति मिली थी। किसान स्वयं भी बहुत मेहनती था। उसने पुरखो से मिली सम्पति को अपनी मेहनत से चार गुना कर लिया था। किसान के पास बहुत से खेत -खलियान थे ,बहुत -से -बैल थे। एक बड़ी -सी हवेली थी जिसमे बहुत से नौकर -चाकर थे। धीरे -धीरे किसान बूढ़ा हो गया और एक दिन उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मृत्यु के बाद उसकी जमीन जायदाद उसके एकलौते पुत्र किशन को मिल गयी। किशन अपने पिताजी से बिलकुल विपरीत स्वभाव का था। जहाँ उसके पिताजी के लिए 'आराम हराम था ' वही किशन के लिए 'काम हराम था 'अर्थात वह बहुत आलसी था। वह कभी भूले से भी खेत -खलियानो पर नहीं जाता था और ना ही पशुओ की देखभाल करता था। ...