Everst shikher
एवरेस्ट शिखर
अध्यापक -बच्चों !क्या तुम बता सकते हो कि धरती का सबसे ऊंचा स्थान कौन -सा है ?
विवेक -सर ,माउंट एवरेस्ट !
अध्यापक -शाबाश !किया तुम बता सकते हो कि शिखर का नाम 'माउंट एवरेस्ट 'क्यों पड़ा ?
रेहाना -सर ,जरूर कोई एवरेस्ट नाम का व्यक्ति होगा ,जिसके नाम पर यह नाम रखा गया।
अध्यापक -तुम्हारा अनुमान बिलकुल ठीक है। सन 1856 में सर जॉर्ज एवरेस्ट के नाम पर इसका नाम माउंट एवरेस्ट पड़ा। वे ब्रटिश सर्वेक्ष्ण अधिकारी थे। उन्होंने यह स्थान खोजा और इसकी उचाई भी बताई।
रशीद -सर ,इससे पहले इस शिखर को किया कहते थे ?
अध्यापक -बच्चों ,पहले इसे 'शिखर -पंद्रह 'कहा जाता था। तुम यह तो जानते हो न कि यह शिखर नेपाल और तिब्बत के बीच में इस्तित है। हमारे गर्न्थो में इस शिखर को '' गौरी शंकर ''तथा नेपाल में इसे 'सगर -माथा 'के नाम से जाना जाता है। 'सगर -माथा 'का नेपाली भाषा में आशय होता है 'आकाश की देवी '
विकाश -सर ,यह शिखर कितना ऊंचा है ?
अध्यापक -यह समुद्र -तल से 8848 मीटर ऊचा है।
संदीप -समुद्र -तल से क्यों ?धरती से क्यों नहीं ,सर ?
अध्यापक -बच्चो !पर्वतो या किसी भी स्थान की ऊंचाई को मापने के लिए समुद्र -तल को ही आधार बनाया जाता है।
सगीता -हा सर ! जब मै नैनीताल गई थी मैने वहाँ एक स्थान पर लिखा हुआ था ,ऊंचाई : समुद्र -तल से 6000 फीट। '
अध्यापक -बिलकुल ठीक ! बच्चों ,सोचकर देखो ,ये पर्वत स्थल तो ज्यादातर छ या सात हजार फीट से अधिक ऊंचे नहीं होते। एवरेस्ट की ऊंचाई फीट में नहीं मीटर में है ,और वह भी आठ सौ अड़तालीस मीटर।
रोहित -इतना ऊंचा है एवरेस्ट ? किया वहाँ पहुँचा जा सकता है ?
अध्यापक -हाँ ! कियो नहीं !लेकिन वहाँ पहुँचना सरल नहीं है। अनेक संकटो का सामना करना पड़ता है।
राहुल -हाँ सर ! मैने 'डिस्कवरी चैनल ' पर देखा था। वहाँ बर्फीले तूफान आते है। गहरी दरारे होती है।
अध्यापक -बिलकुल ठीक ! बच्चों ,तुम यह तो जानते ही हो इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन कम होती है।
इसीलिए वहाँ सांस लेने में कठनाई होती है।
देवांश -फिर तो सर ,वहाँ जाना जोखिम का काम है।
अध्यापक -एवरेस्ट जैसे ऊंचे शिखरों पर चढ़ने में जोखिम -ही -जोखिम है। कभी -कभी वहाँ बर्फ की चटाने अचानक तेजी से टूट -टूट कर झरने की तरह नीचे गिरने लगती है। इसे 'एवलांच ' या 'हिम स्खलन 'कहते है।
निहारिका -फिर तो वहाँ जाने के लिए बहुत साहस चाहिए।
अध्यापक -साहस भी और दृढ़ -निस्चय भी। आज तक बहुत सारे पर्वतारोही एवरेस्ट पर विजय पताका फहरा चुके है। किया तुम जानते हो ,सबसे पहले किसके कदम इस शिखर पर पड़े ?
नितिन -हाँ सर ! मै जानता हूँ। वे थे एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे।
अध्यापक -शाबाश नितिन ! वे 29 मई 1953 को एवरेस्ट शिखर पर पहुँचे थे। वहाँ पहुँचने वाली विश्व की पहली महिला थी -जापान की जुंको तबाई ,जो 16 मई 1975 को वहाँ पहुँची थी।
जूही -सर ! किया हमारे देश की कोई महिला एवरेस्ट तक नहीं पहुँच पाई ?
अध्यापक -कियो नहीं बच्चों ! हमारे देश की पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने 23 मई 1984 को एवरेस्ट पर तिरंगा लहराया था।
निहारिका -फिर तो वहाँ जाने के लिए बहुत साहस चाहिए।
अध्यापक -साहस भी और दृढ़ -निस्चय भी। आज तक बहुत सारे पर्वतारोही एवरेस्ट पर विजय पताका फहरा चुके है। किया तुम जानते हो ,सबसे पहले किसके कदम इस शिखर पर पड़े ?
नितिन -हाँ सर ! मै जानता हूँ। वे थे एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे।
अध्यापक -शाबाश नितिन ! वे 29 मई 1953 को एवरेस्ट शिखर पर पहुँचे थे। वहाँ पहुँचने वाली विश्व की पहली महिला थी -जापान की जुंको तबाई ,जो 16 मई 1975 को वहाँ पहुँची थी।
जूही -सर ! किया हमारे देश की कोई महिला एवरेस्ट तक नहीं पहुँच पाई ?
अध्यापक -कियो नहीं बच्चों ! हमारे देश की पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने 23 मई 1984 को एवरेस्ट पर तिरंगा लहराया था।


Comments