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Khel ke fayde

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खेल से हमारी मानसिक इस्थिति ठीक रहती है। बच्चो के साथ -साथ आम आदमी को भी समय निकलकर कोई भी खेल खेलना चाहिए।   खेल हमारे जीवन में बहुत ही जरूरी है। खेल से शरीर में कभी कोई भी परेशानी नहीं होती। खेल से हमारे शरीर की हर एक नस काम करती है। खेल से हम हर एक टेंसन से मुक्त हो जाते है ,जब की तक की हम खेलते है। खेल से शरीर की फिटंश रहती है। खेल भी कई प्रकार के होते है ,जैसे -हॉकी ,क्रिकेट ,फ़ुटबॉल ,लूडो ,टेनिस ,कुस्ती ,साईकिल रेसिंग ,संतरज ,कैरम आदि है। हर खेल का अपना महत्व होता है। हर खेल से हमारी शरीर की फिटनिस अलग तरह से होती है। आज कल सबसे ज्यादा खेल क्रिकेट पसंद है। क्रिकेट का जन्म इग्लेंड में हुआ था। क्रिकेट में बारह खिलाडी होते है। तीन एपायर होते है। जिन्हे हम आम भाषा में बोले तो निर्णय देने वाले लोग की कौन सही खेल रहा है ,और कौन गलत खेल रहा है। खेल -खेल में अक्सर आपस में दोनों टीमों की खिलाड़ियों का झगड़ा हो जाता है ,तो इसलिए ही एपायर होते है। जिनके निर्णय मान्य माना जाता है। खेल में अक्सर एक टीम को तो हारना ही होता है। क्रिकेट में एक बड़ा मैदान की जरूरत होती है। जिससे की ...

Bhart ko aajad krne ke liye kdi mhnt kri in mhapursho ne

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आज हम उन महापुरषो को भूलते जा रहे है जिनकी वजह से आज हम आजादी का आनंद ले रहे है। हम सब एक बार फिर उनको याद कर लेते है।  1857 के विद्रोह के बाद ,भारत के लोगो ने महसूस किया कि भारतीय समाज में अनेक सामाजिक कुरीतियाँ ,जैसे --जाति प्रथा ,सती प्रथा ,बाल विवाह तथा बालिका शिशु हत्या ऐसी कुरीतियाँ थी ,जो समाज का नाश कर रही थी तथा इसे पिछड़ा बना रही थी। ये भारत तथा इसकी जनता की बुरी दशा का कारण थी।           कुछ शिक्षित भारतीयों ,जैसे --राजा राममोहन राय ,ईश्वर चंद्र विद्यासागर ,सर सैय्यद अहमद खां ,नारायण गुरु आदि ने अनुभव किया कि विधवाओं तथा स्त्रियों के उत्थान के लिए इन पुरानी धारणाओं तथा अंधविश्वासों को समाप्त करना आवश्यक है। उन्होंने अनुभव किया कि समाज में इन परिवर्तनों के बिना भारत एकजुट होने तथा अंग्रेजो से लड़ने में सक्षम नहीं हो सकता।                                          यह कार्य लोगो को शिक्षित करके किया जा सकता था। अनेक समाज -सुधारको न...

Vrksho ka mhttv

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वृक्ष हमारे किये अत्यंत  उपयोगी है। कवि ने वृक्षों के महत्त्व का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया है।  संध्या हो या दिवस सवेरा , ऑक्सीजन बिखराते पेड़।  पर पीड़ा हर सुख दे करके  अपना सर्वस्व लुटाते पेड़।  अगर पेड़ है तो छाया है , अगर है तो हरियाली।  कोयल ,कौआ ,तोता ,मैना , सबका घर वृक्षों की डाली।  "मानव क्यों बेदर्द बना तू ", अपना राग सुनाते पेड़।  अंगविहीन होने पर भी , अश्रु नहीं बहाते पेड़।  पत्थर मारो फल देते है , सदा फूलते -फलते है।  सदा -साधुओ की विधि तरुवर , जीवन धन दे चलते है।  खंजन ,बुलबुल ,बया ,फाख्ता , दिल में इन्हे बसाते पेड़।  ईंधन ,चारा फल -फूल ,ओषधि , दे करके मिट जाते पेड़।  इन्हे देखकर बादल आते , धरती की प्यास बुझाते है।  धूल ,धुए को दूर भगाकर , पर्यावरण को शुद्ध बनाते है।  हरियाली की वुंदावली सी , धरती पर ये लाते पेड़।  रोग विनाशक ,शोक निवारक , सबको सुख पहुंचते पेड़। 

Jgdish chndr bsu ka jivn prichy

 भारत के महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु ने अपनी वैज्ञानिक खोजो से समस्त विश्व का कल्याण किया है।  जगदीश चंद्र बसु भारत के महान वैज्ञानिक थे। उन्होंने जो वैज्ञानिक खोजे की थी ,उनके लिए सारा संसार उनका रर्णी रहेगा। उनका जन्म 30 नवंबर ,1858 ई ०  को ढाका के गांव विक्रमपुर में हुआ था। उनके पिता श्री भगवान चंद्र बसु डिप्टी कलक्टर थे। जगदीश चंद्र की आरंभिक शिक्षा गांव की पाठशाला में हुई। इसके बाद वे कलकत्ता के सेंट जेवियर कॉलेज में प्रविष्ट हुए। यहाँ से उन्होंने बी0ए0 की परीक्षा पास की। उन्होंने जगदीश चंद्र आई0 सी0 एस0 की परीक्षा पास करना चाहते थे। लेकिन उनके पिता इस पक्ष में नहीं थे। उन्होंने ,"जगदीश ! तुम दुसरो पर शासन करने की बात मत सोचो। तुम्हे विद्वान् बनकर संसार को कुछ देना चाहिए। "                             पिता की बात सुनकर जगदीश चंद्र डॉक्टरी पढ़ने के लिए लंदन चले गए। वहाँ स्वास्थ्य ने उनका साथ न दिया। वे बीमार पड़ गए। डाक्टरों ने उन्हें जलवायु बदलने का परामर्श दिया। वे कैंब्रिज चले गए। वहाँ उन...

Purskar

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परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हो ,किसी भी स्तितित में हमे सच्चाई और ईमानदार का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। इस कहानी में यही एक किस्सा लिख रहे है।  ( दृश्य --घर के एक कमरे में चारपाई के ऊपर राम की बीमार माँ लेटी हुई है। ) माँ >बेटा राम !तुम्हारे स्कूल जाने का समय हो गया है। अब तुम जाने की तैयारी करो। तुम्हारी परीक्षाए भी पास आ गयी है।  राम >नहीं माँ ,मै आपको इस दशा में छोड़कर नहीं जाऊंगा। मुझे आपकी दवा भी तो लानी है।  माँ >दवा ! कहाँ से लाएगा ? दवा क्या बिना पैसों के आ जाती है ?थोड़ा बुखार है, उतर जाएगा। तू अपनी पढ़ाई मत छोड़ ,पर तूने तो कल कुछ नहीं खाया। भूखे पेट क्या पढ़ाई होगी ?जा महेश की दुकान से बिस्कुट ले आ।  राम >>मै नहीं जाऊंगा महेश के पास। वह पिछले उधार के पैसे मांगेगा। आप मेरी चिंता मत करो। मै स्कूल में कुछ न कुछ खा लूंगा।  माँ >>स्कूल में कहाँ से खा लेगा ? राम >>मेरे कई मित्र है। वे मुझे बिना खिलाए नहीं मानते है। पर आपकी दवा. .........  माँ >>मेरी दवा की चिंता छोड़। कल तक मै ठीक हो जाउंगी। काम पर जाना शुरू कर...

Raja vikramaditya ki khani

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भारत -भूमि पर अनेक महापुरषो ने जन्म लिया है। राजा विक्रमादित्य ऐसे ही एक महापुरुष थे।  राजा विक्रमादित्य न्याय के लिए प्रसिद्ध थे। वे भारत के उन सम्राटो में गिने जाते है ,जिनकी न्यायप्रियता की कहानियाँ आज भी सुनाई जाती है। उन्ही के समय से विक्रमी संवत चला आ रहा है। वे अपनी प्रजा की भलाई के लिए सदा प्रयत्नशील रहते थे। रात के समय वेष बदलकर वे नगर में घुमा करते थे। इसलिए कि वे स्वयं जाकर देख सके कि कोई दुखी तो नहीं है।       एक दिन सम्राट घूमने निकले। रात आधी से अधिक बीत चुकी थी। सम्राट साधारण वस्त्र में घोड़े पर सवार होकर चल पड़े। साथ में मंत्री थे। चांदनी रात थी। प्रजा सुख की नींद सो रही थी। सम्राट घूमते -घमते नगर से बाहर निकल गए। घोड़े से उतरकर टहलने लगे। मंत्री कुछ रह गए। घोडा साथ वाले खेत में चला गया। खेत में ईख लहलहा रही थी। अचानक शब्द हुआ ,"कौन है ?" इतने में एक किसान सामने आ खड़ा हुआ। वह रात के इस पिछले पहर में सम्राट को पहचान नहीं सका। कहने लगा ,"तुम कौन हो ? क्या यह घोडा तुम्हारा है ?इसने मेरे सात पेड़ रोद डालें है। क्या तुम जानते हो ,सम्राट विक्रमाद...

Pnna dhaay ki khani

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पन्ना धाय के बलिदान की कहानी इतिहास में अमर है। इस कहानी में हम एक किस्सा उनका लिख रहे है।  चित्तोड़ के महाराणा सांगा स्वर्ग सिधार चुके थे। उस समय उनके पुत्र उदयसिंग की अवस्था छह वर्ष ही थी। इसलिए शासन की बागडोर उदयसिंग के युवा होने तक उसके चचरे भाई बनवीर के हाथो में सोप दी गयी। बनवीर बहुत ही गुस्से वाला और अत्याचारी था।       राज्य मिलने पर उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि मै तभी तक राजा हूँ ,जब तक उदयसिंह बड़ा नहीं होता। इसलिए वह उदयसिंह को अपने रास्ते से हटाकर स्वयं राजसिंहासन हथियाने के उपाय सोचने लगा। कुंवर उदयसिंह का पालन -पोषण पन्ना धाय कर रही थी। वह बहुत स्वमीभगत थी। उसे बनवीर की चाल का पता था। एक रात पन्ना धाय राजकुमार और अपने बेटे चंदन को सुला रही थी। उसे पता चला कि बनवीर उदयसिंह का वध करने के लिए आने वाला है। उसने अपने बेटे को चंदन को उदयसिंह के बिस्तर पर सुला दिया और उदयसिंह को पत्तलो के टोकरे में छिपाकर सेवक कीरतबारी के द्वारा सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का निश्च्य किया। पन्ना ने कीरतबारी से कहा ,"तुम टोकरा लेकर नदी किनारे पहुँचो ,मै शीघ्...